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रहमत वाली रात है शब-ए-बारात, इस्लाम में इबादत करने की क्या है अहमियत?

मेवाड़ समाचार

रहमतों की बारिश और गुनाहों से छुटकारे की रात का प्रतीक पर्व शब-ए-बरात 13 फरवरी की शाम मगरिब की नमाज से शुरू कर सुबह सादिक तक इबादतपूर्वक मनाया जाएगा। मुस्लिम समुदाय के लोग पूरी रात जागकर अल्लाह की इबादत में लीन रहेंगे। वहीं, अगले दिन मुस्लिम अकीदतमंद रोजे रखेंगे। छोटे-बड़े सभी पूरी रात अल्लाह पाक की इबादत कर गुनाहों की माफी मांगेंगे। इस दौरान घरों में तरह-तरह के पकवान भी बनेंगे। अपने पूर्वजों की कब्र पर जाकर दुआ-ए-मगफिरत भी की जाएगी। शाम से ही मस्जिद सहित जगह-जगह दुआ ए-जलसा भी आयोजित होंगे।

शब-ए-बरात को लेकर बच्चे, बूढ़े, जवान सभी उत्साहित नजर आ रहे हैं। शब-ए-बरात त्योहार को लेकर एक सप्ताह पूर्व से ही इसकी तैयारियों में मुस्लिम परिवार जुटे दिख रहे हैं। वहीं मस्जिद, कब्रिस्तान, दरगाहों पर भी विशेष व्यवस्था के साथ रोशनी और साफ-सफाई की व्यवस्था की जा रही है। गुनाहों से माफी की रात के रूप में मनेगी शब-ए-बरात मदरसा फैजुलबारी के इमाम मौलाना नोमान अख्तर जमाली ने कहा कि शब-ए-बरात का मतलब छुटकारे की रात से है।

इस्लाम मजहब में इस रात की बहुत अहमियत है। शब यानी रात। इस इबादत की रात को अपने गुनाहों की सभी माफी मांगेंगे। जबकि अगले दिन लोग रोजा रखेंगे। यह रात हजार रातों से अफजल है इसलिए सभी शब-ए-बरात पर अपने तरीके से खुदा की बंदगी करेंगे। शब-ए-बरात की अहमियत को निबाहेंगे सभी मौलाना ने बताया कि इस रात में इबादत करने वाले के सारे गुनाह माफ हो जाते हैं।

फरिश्ते रहमत के साथ जमीन पर उतरते हैं। इस रात में हर हिकमत वाला काम बांटा जाता है। जिंदा होने व मरने वालों की फेहरिस्त बनती है। लोगों के अमाल रब की बारगाह में पेश होते हैं और रिज्क उतारे जाते हैं। इसलिए अकीदतमंद बेहतरी के लिए खुदाई खिदमत में लगे रहें। इधर, उन्होंने उत्साही युवाओं को पटाखे छुड़ाने के अलावा सड़कों पर उछल-कूद आदि करने से परहेज की बात समझायी है। गरीबों के लिए होगी खास रात शब-ए-बरात गरीबों के लिए भी बिल्कुल खास होता है।

उनके त्योहार को यादगार बनाने की पहल दौलतमंद लोग करते हैं। सभी उनके साथ भी त्योहार की खुशियां बांटने की तैयारी में जुटे हैं। इस दिन उन सभी लोगों के लिए भी दुआ की जाती है, जो दुनिया से जा चुके हैं और उनके नाम का खाना गरीबों को खिलाया जाएगा। आमतौर पर चने की दाल का हलवा, सूजी का हलवा या कुछ मीठा बांटा जाता है। इसलिए गरीबों और मिस्किनों के लिए यह पर्व बेहद खास हो जाता है। उन्हें खैरात भी दिए जाएंगे। इस रात कोई भूखा नहीं सोए, इस बात का खास ख्याल रखा जाएगा।

पर्व पर बनाया जाएगा विशेष पकवान हलवा मौलाना नोमान अख्तर जमाली ने बताया कि कहते हैं कि जंगे उहुद में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने हलवा खाया था। इसलिए त्योहार के दिन हलवा खाना सुन्नत है। त्योहार में विशेष तौर पर लोग हलवा बनाते हैं, खुद खाते हैं और दोस्त अहबाबों और मिस्कीनों के बीच बांटा जाता है। इस मान्यता के कारण घर-घर हलवा बनता है जबकि कई किस्म का हलवा बनता है। जिले भर में रहेगी पर्व की धूम जिले समेत विभिन्न प्रखंडों व आसपास के क्षेत्रों में मुस्लिम भाइयों का अफजल व बरकत का त्योहार शब-ए-बारात मनाया जाएगा।

इस अवसर पर घरों, मस्जिदों व कब्रिस्तानों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। त्योहार को ले मस्जिद से लेकर कब्रिस्तान तक को सजाया व संवारा जा हा है। मुस्लिम अकीदतमंद अपने नजदीकी मस्जिद में नमाज अदा करेंगे। मुस्लिमजन मस्जिद में नमाज अदा करने के बाद अपने पूर्वजों के कब्र पर जा कर फातेहा पढ़ेंगे व कब्र पर मोमबत्ती जलाएंगे। कुल मिला कर शब-ए-बरात पर मुस्लिम धर्मावलम्बी नमाज, तिलावत-ए-कुरान, कब्रिस्तान की जियारत व हैसियत के मुताबिक खैरात करेंगे और अपने त्योहार को खास बनाएंगे।

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Author: mewadsamachar

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